देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर चुनाव खत्म होते ही “महंगाई की मार” बढ़ाने का आरोप लगाया है, जबकि आम लोग भी अचानक बढ़ी कीमतों को लेकर नाराज नजर आ रहे हैं।
सरकारी तेल कंपनियों ने 15 मई से पेट्रोल और डीजल के दामों में लगभग 3 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की है। यह बढ़ोतरी पिछले चार वर्षों में पहली बड़ी वृद्धि मानी जा रही है। (Reuters)
कितनी बढ़ीं कीमतें?
नई दरों के अनुसार दिल्ली में पेट्रोल की कीमत करीब ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर पहुंच गया है। मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत अन्य महानगरों में भी दामों में वृद्धि दर्ज की गई है। (Reuters)
विशेषज्ञों के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव इसके प्रमुख कारण हैं।
ईरान संकट और वैश्विक तेल बाजार का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अनिश्चितता के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी दबाव बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू ईंधन दरों पर पड़ रहा है। (Reuters)
विपक्ष ने सरकार को घेरा
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव खत्म होने के तुरंत बाद सरकार ने ईंधन कीमतें बढ़ाकर आम जनता पर बोझ डाल दिया।
कुछ विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के हालिया “ईंधन बचत” संदेश को भी इस बढ़ोतरी से जोड़ते हुए सवाल उठाए।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार विपक्ष ने कहा कि पहले जनता से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने की अपील की गई और अब कीमतें बढ़ा दी गईं। (The Times of India)
सड़कों पर लोगों की नाराजगी
NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट्स में कई यात्रियों और वाहन चालकों ने कहा कि पहले से महंगाई झेल रहे आम लोगों पर अब अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर से जुड़े लोगों का कहना है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई की लागत बढ़ेगी, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
महंगाई बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहता।
परिवहन महंगा होने से:
- खाद्य वस्तुएं
- सब्जियां
- दूध
- ऑनलाइन डिलीवरी
- सार्वजनिक परिवहन
- टैक्सी और ऑटो किराया
सभी पर असर पड़ सकता है।
तेल कंपनियों पर बढ़ रहा था दबाव
रिपोर्ट्स के अनुसार सरकारी तेल कंपनियां लंबे समय से घाटे में ईंधन बेच रही थीं। Reuters की रिपोर्ट में कहा गया कि कंपनियों पर भारी वित्तीय दबाव बढ़ रहा था। (Reuters)
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखकर महंगाई को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों के कारण यह दबाव बढ़ता गया।
RBI ने भी जताई थी चिंता
RBI गवर्नर ने भी संकेत दिए थे कि यदि पश्चिम एशिया संकट लंबा चलता है, तो भारत में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी लगभग तय हो सकती है। (The Economic Times)
सोशल मीडिया पर भी बहस तेज
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सोशल मीडिया पर भी तीखी बहस देखने को मिली। कुछ लोगों ने इसे वैश्विक परिस्थितियों का असर बताया, जबकि कई यूजर्स ने टैक्स कम करने की मांग उठाई।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में वैश्विक तेल बाजार की स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होगी। यदि पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं हुआ, तो कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है।
हालांकि सरकार और तेल कंपनियों की ओर से अभी आगे किसी अतिरिक्त बढ़ोतरी को लेकर औपचारिक संकेत नहीं दिए गए हैं।
निष्कर्ष
पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई नई बढ़ोतरी ने आम जनता, विपक्ष और आर्थिक विशेषज्ञों—तीनों के बीच चिंता बढ़ा दी है। Narendra Modi सरकार अब बढ़ती महंगाई और राजनीतिक दबाव दोनों का सामना कर रही है।
आने वाले दिनों में वैश्विक तेल बाजार और घरेलू आर्थिक फैसले तय करेंगे कि ईंधन कीमतों का यह दबाव कितना लंबा चलता है।