भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से अटका तीस्ता जल बंटवारा समझौता एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। बांग्लादेश ने साफ संकेत दिए हैं कि वह अब इस मुद्दे पर अनिश्चितकाल तक भारत का इंतजार करने के पक्ष में नहीं है और जरूरत पड़ने पर चीन के साथ आगे बढ़ सकता है। ढाका से आए इस बयान ने दक्षिण एशिया की कूटनीति और क्षेत्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
बांग्लादेश की ओर से यह प्रतिक्रिया ऐसे समय में आई है जब देश में राजनीतिक माहौल गर्म है और तीस्ता परियोजना को लेकर विपक्षी दल भी सक्रिय हो गए हैं। वहीं भारत के लिए यह मामला केवल जल बंटवारे तक सीमित नहीं बल्कि रणनीतिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
क्या है तीस्ता नदी विवाद?
Teesta River हिमालय से निकलने वाली एक महत्वपूर्ण नदी है, जो भारत के सिक्किम और पश्चिम बंगाल से होकर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। यह नदी दोनों देशों के लिए सिंचाई, कृषि और जल आपूर्ति का बड़ा स्रोत मानी जाती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच वर्षों से इस नदी के पानी के बंटवारे को लेकर बातचीत चल रही है। 2011 में एक संभावित समझौता लगभग तय माना जा रहा था, लेकिन पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों के बाद मामला अटक गया।
बांग्लादेश लगातार यह कहता रहा है कि उसे सूखे के मौसम में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे उसके उत्तरी इलाकों की कृषि प्रभावित होती है।
बांग्लादेश ने क्या कहा?
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बांग्लादेश ने कहा है कि वह तीस्ता परियोजना को लेकर लंबे समय तक प्रतीक्षा नहीं कर सकता। ढाका का कहना है कि यदि भारत के साथ समझौते में लगातार देरी होती रही तो वह वैकल्पिक सहयोग के रास्ते तलाशेगा, जिसमें चीन के साथ बातचीत भी शामिल हो सकती है।
बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी BNP ने इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee पर भी आरोप लगाए हैं। BNP नेताओं का कहना है कि तीस्ता समझौता आगे नहीं बढ़ पाने के पीछे पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियां बड़ी वजह रही हैं।
विपक्षी नेताओं ने यह भी दावा किया कि भारत की आंतरिक राजनीति का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ रहा है।
चीन की एंट्री क्यों महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि चीन तीस्ता परियोजना में सक्रिय रूप से शामिल होता है, तो यह भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है। चीन पहले से ही बांग्लादेश में कई इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं में निवेश कर रहा है।
तीस्ता नदी से जुड़े संभावित विकास कार्यों में चीन की भागीदारी भारत के पूर्वोत्तर और बंगाल क्षेत्र की भू-राजनीतिक संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकती है।
भारत लंबे समय से दक्षिण एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर सतर्क रहा है। ऐसे में तीस्ता मुद्दा केवल जल विवाद नहीं बल्कि क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा भी बनता जा रहा है।
भारत के लिए क्यों जटिल है मामला?
भारत के लिए तीस्ता समझौता इसलिए भी जटिल है क्योंकि इसमें केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकार की सहमति भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पश्चिम बंगाल सरकार का तर्क रहा है कि यदि ज्यादा पानी बांग्लादेश को दिया गया तो राज्य के उत्तरी हिस्सों में जल संकट पैदा हो सकता है।
Mamata Banerjee पहले भी कह चुकी हैं कि राज्य के किसानों और स्थानीय जरूरतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इसी वजह से केंद्र सरकार अब तक अंतिम समझौते को लागू नहीं कर पाई है।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर?
भारत और बांग्लादेश के संबंध पिछले एक दशक में काफी मजबूत हुए हैं। व्यापार, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और सीमा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है।
हालांकि तीस्ता विवाद उन चुनिंदा मुद्दों में शामिल है जहां अब भी समाधान नहीं निकल पाया है। बांग्लादेश में कई राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर प्रगति न होने से आम लोगों में निराशा बढ़ी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह विवाद लंबा खिंचता है, तो इसका असर दोनों देशों के राजनीतिक और रणनीतिक संबंधों पर पड़ सकता है।
जल कूटनीति का बढ़ता महत्व
दक्षिण एशिया में नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं बल्कि कूटनीतिक और राजनीतिक मुद्दे भी बन चुकी हैं। भारत, नेपाल, भूटान, चीन और बांग्लादेश के बीच कई नदियों को लेकर रणनीतिक महत्व जुड़ा हुआ है।
जलवायु परिवर्तन और बढ़ती आबादी के बीच पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भविष्य में जल बंटवारे के मुद्दे और संवेदनशील हो सकते हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि तीस्ता विवाद का समाधान केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति और क्षेत्रीय सहयोग से ही संभव है।
आगे क्या?
फिलहाल दोनों देशों की ओर से औपचारिक बातचीत जारी रहने की उम्मीद है। लेकिन बांग्लादेश के हालिया संकेतों ने साफ कर दिया है कि ढाका अब इस मुद्दे पर तेजी से प्रगति चाहता है।
भारत के लिए चुनौती यह होगी कि वह एक ओर बांग्लादेश के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत रखे और दूसरी ओर घरेलू राजनीतिक तथा क्षेत्रीय चिंताओं का भी संतुलन बनाए।
निष्कर्ष
Teesta River को लेकर बढ़ता विवाद दक्षिण एशिया की बदलती कूटनीति की नई तस्वीर पेश कर रहा है। बांग्लादेश का चीन की ओर देखने का संकेत भारत के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि लंबित मुद्दों का समाधान समय रहते निकालना जरूरी है।
आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या भारत और बांग्लादेश तीस्ता समझौते पर आगे बढ़ पाते हैं या यह मुद्दा क्षेत्रीय रणनीतिक प्रतिस्पर्धा को और तेज कर देगा।