दिल्ली के विवेक विहार इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद राजधानी मंगलवार को उस दर्दनाक मंजर की गवाह बनी, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। हादसे में जान गंवाने वाले नौ लोगों का अंतिम संस्कार निगमबोध घाट पर किया गया। एक साथ उठती अर्थियां, रोते-बिलखते परिजन और श्मशान घाट पर पसरा सन्नाटा पूरे माहौल को बेहद भावुक बना रहा था।
इस हादसे ने न सिर्फ राजधानी दिल्ली को झकझोर दिया है, बल्कि अस्पतालों और इमारतों में सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों के परिवारों का कहना है कि अगर समय रहते उचित इंतजाम होते, तो शायद इतने लोगों की जान नहीं जाती।
देर रात लगी आग, मच गई अफरा-तफरी
विवेक विहार में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में भयावह रूप ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चीख-पुकार और धुएं के बीच लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते नजर आए।
दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक कई लोगों की जिंदगी खत्म हो चुकी थी। हादसे में घायल हुए लोगों का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।
निगमबोध घाट पर नम आंखों से दी गई विदाई
मंगलवार को जब नौ शव निगमबोध घाट पहुंचे, तो वहां का दृश्य बेहद दर्दनाक था। परिजन अपनों को अंतिम बार देखकर टूट गए। कई परिवारों के सदस्य बेसुध नजर आए, जबकि महिलाओं और बच्चों की चीखों से माहौल गमगीन हो गया।
श्मशान घाट पर मौजूद लोगों ने बताया कि लंबे समय बाद ऐसा दृश्य देखने को मिला, जब एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अंतिम संस्कार किए गए। प्रशासन और पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद रही ताकि व्यवस्था बनी रहे।
कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने भी पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। अंतिम संस्कार के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और मृतकों को श्रद्धांजलि दी गई।
हादसे ने उठाए सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
इस अग्निकांड के बाद एक बार फिर दिल्ली में फायर सेफ्टी सिस्टम को लेकर बहस शुरू हो गई है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ऐसी घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं और सुरक्षा नियमों का पालन कितना प्रभावी तरीके से किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में कई इमारतें और संस्थान ऐसे हैं जहां फायर सेफ्टी उपकरण या तो काम नहीं करते या फिर मानकों के मुताबिक मौजूद ही नहीं हैं। ऐसे में हादसे के समय लोगों को बचाने में बड़ी मुश्किल आती है।
प्रारंभिक जांच में आग लगने के कारणों की पड़ताल की जा रही है। पुलिस और फायर विभाग की टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि हादसा तकनीकी खराबी से हुआ या सुरक्षा मानकों में किसी तरह की लापरवाही थी।
सरकार ने दिए जांच के आदेश
दिल्ली सरकार और प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
सरकार की ओर से पीड़ित परिवारों को सहायता देने की बात भी कही गई है। हालांकि परिवारों का कहना है कि उनके अपने वापस नहीं आ सकते और इस त्रासदी की भरपाई संभव नहीं है।
स्थानीय लोगों में गुस्सा
हादसे के बाद इलाके के लोगों में काफी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि सुरक्षा इंतजामों में गंभीर लापरवाही बरती गई। कुछ स्थानीय निवासियों ने प्रशासन पर समय रहते कार्रवाई न करने का भी आरोप लगाया।
लोगों का कहना है कि अगर नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन सख्ती से कराया जाता, तो इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।
राजधानी फिर सवालों के घेरे में
दिल्ली में पिछले कुछ वर्षों में आग लगने की कई बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हर हादसे के बाद जांच और सख्ती की बात होती है, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ जाता है। विवेक विहार अग्निकांड ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि सुरक्षा नियमों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
यह हादसा उन परिवारों के लिए जिंदगीभर का दर्द छोड़ गया है, जिन्होंने एक ही पल में अपने अपनों को खो दिया। निगमबोध घाट पर उठती नौ अर्थियों का दृश्य लंबे समय तक लोगों के दिलों में बना रहेगा।